World After Life: Voice of Your Heart (listen first in your life)(दिल की आवाज )

Tuesday, May 23, 2017

Voice of Your Heart (listen first in your life)(दिल की आवाज )

    सार्थक और सकारात्मक जीवन जीने के लिए ज्यादा मेनहत की जरुरत नहीं है। प्रायः लोग इसके लिए भटकते रहते हैं ,जब कि हर मानव के पास ईश्वर प्रदत्त दिमाग है जो पुरे शरीर को संचालित करता है तथा वही जीवन की यात्रा भी तय करता है। कोई बिपरीत स्थितियों और परिस्थितयों के बावजूद अपने दिमाग का सही और सटीक इस्तेमाल करके ऊँची उपलब्धियां हासिल कर लेता है और कई लोग सभी सुबिधाओं के होने के बावजूद असफल ही रहते हैं। हर इंसान को सबसे पहले सुनने की आदत डालनी चाहिए।
    जो व्यक्ति सुनता कम है और बोलता ज्यादा है ,वह आगे बढ़ने के अनेक अवसरों से चूक जाता है। बड़े बड़े महापुरुषों ने शुभ और सुखद सुनने की कला बताई है। जब कोई व्यक्ति विद्वानों ,श्रेष्ठजनों और सफल लोगों की बातें सुनता है तो शब्द रूपी ऊर्जा कानों से प्रवेश कर के मष्तिष्क में रासायनिक परिवर्तन करती है। दिमाग में अच्छी बातें और अच्छे विचार आते हैं। वहीं खराब और बुरी बातें सुनने के बाद कभी कभी झगड़े और फसाद हो जाते हैं। अपने देखा होगा की घर से दूर रहे किसी भी व्यक्ति को बुरी खबर सीधे नहीं बतायी जाती। यही है शब्दों का प्रभाव। किसी के भी मन में अच्छा या बुरा भाव पैदा करने में शब्दों का ही योगदान होता है। प्रेम की भी शुरुआत शब्द से और युद्ध की भी शुरुआत शब्द से ही होता है। आध्यात्मिक पुस्तकों में जीवन की हर जरूरतों को पूरा करने के लिए अच्छे विचारों को अच्छे शब्दों में बताया गया है। पुरातन समय में श्रुतिज्ञान की ही व्यवस्था थी। किसी भी इन्सान में सुनने के बाद जिज्ञासाएं बढ़ती हैं ,तो अध्ययन की स्वतः इच्छा पैदा होने लगती है जिसके पास जितना गूढ़ ज्ञान ,उसका उतना महत्ता।
     ज्ञान से चिंतन -मनन का भाव पैदा होता है। जैसे जेम्सवाट ने भाप की आवाज को  पहचाना कि भाप में शक्ति होती है ,उसी तरह न्यूटन ने सेब गिरने की आवाज सुन ली और जिज्ञासु होकर गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत का प्रतिपादन किया। बड़े विज्ञान के प्रोजेक्ट क्यों न हों  उनमें भी डिजायन और प्लॉनिंग करके उसी हिसाब से धन की व्यवस्था की जाती है फिर उस प्रोजेक्ट को  डिजाइन के अनुरूप काम शुरू होता है। इसी तरह जीवन में सबसे पहले मन की आवाज जरूर सुननी चाहिए। प्रथम स्तर पर हमारा मन ही बहुत कुछ बता देता है। गलत कामों को तो जरूर बताता है। आस-पास की घटनाओं ,माता -पिता आदि की बातों को गहरायी  सुनकर और उस पर स्वतः मनन करके जब कोई कदम उठायेंगे तो वह बेहतर होगा। 

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