इस भागदौड़ भरी जिंदगी में समुचित प्रयास के बिना मनमाफिक परिणाम का ना मिलना स्वाभाविक है। आदमी की जिंदगी में सफलता असफलता ,सुखदुख भले ही एक दूसरे के बिपरीत हों पर सम्बन्ध सीधा रखते हैं। जब हमें फल हमारी इच्छानुसार मिलते हैं तो हम आशावादी होते हैं ,मगर जब यही इच्छानुसार ना हो तो निराशा के भंवर में डूब जाते हैं। सफलतायें हमें आशावादी और असफलतायें निराशावादी बनाती हैं। चूँकि यह जरुरी नहीं की हमेशा हर काम हमारे इच्छा के अनुसार ही हो ,इसलियेअसफलता मिलने पर कभी भी निराश नहीं होना चाहिये ,और ना ही हार माननी चाहिये। यदि आपके मन में भी निराशा जनक विचार पनप रहे हों तो आप कुछ बातों पर ध्यान देकर उनसे छुटकारा पा सकते हैं।
कभी भी अपना लक्ष्य बहुत बड़ा ना रखें। पहले अपनी योग्यताओं का आकलन करें। सपनें संजोना अच्छी बात तो है पर यथार्थ भी कुछ होता है। सपनों का सच होना उनसे जुड़े कई तथ्यों पर निर्भर करता है। जो भी आप लक्ष्य निर्धारित कर रहे हैं क्या उसे पूरा करने लायक योग्यता रखते हैं या नहीं। क्या आप लक्ष्य प्राप्त करने तक अपने निर्णय पर अडिग रह पाएंगे अथवा नहीं ? क्या आपके पास समुचित साधन है ?
हमेशा अपनी योग्यता और क्षमता अनुसार ही अपने लक्ष्य का निर्धारण करें।
समय और अपनी प्रयास करने की क्षमता का सही उपयोग करें। इन दोनों का तालमेल यदि बैठ जाय तो कोई भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है यदि आप समय का सही समय पर सही तरीके से अपनी पूरी क्षमता के साथ सही दिशा में प्रयास करेंगे तो ऐसा कोई कारण नहीं है कि आप सफल ना हों। हमेशा एक बात का ध्यान रखें गुजरा हुआ समय कभी वापस नहीं आताऔर ना ही समय किसी का इंतजार करता है।
प्रेरणा और पॉज़िटिव सोच एक ऐसी शक्ति है जिसके द्वारा हम अपनी इच्छानुसार परिणाम पा सकते हैं। हमारा इतिहास ऐसी कहानियों से भरा पड़ा है कि दृढ़ इच्छाशक्ति के बदौलत लोगों ने असम्भव लगने वाले कार्यों को संभव कर दिखाया। सकारात्मक सोच से हमारे मन में आशावादी विचारों का सृजन होता है ,जिसके फलस्वरूप एक अलग तरह की ऊर्जा उत्पन्न होती है। यही ऊर्जा हमारे भीतर हमारे संकल्पो को मजबूत बनाती है। सकारात्मक सोच और आशावादी विचार हमेशा अपने लक्ष्य के नजदीक ही ले जाते हैं। अतः हमेशा हमें ऐसे लोगों के संपर्क में रहना चाहिए जिनके व्यक्तित्व प्रेरक और जिनकी सोच सकारात्मक हो। कभी कभी सफल लोगों की जीवनी पढ़कर उनसे कुछ हासिल करने की कोशिश करनी चाहिये।
अपने तथा अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखें एवं कभी अपने को कम करके न आंके। क्योंकि कभी कभी ऐसा होता है कि हम अपनी तुलना दूसरों से कर के अपने आपको कम करके आंकने लगते हैं। हर आदमी का स्वभाव और क्षमता अलग अलग होती है। हो सकता जिससे आप अपनी तुलना कर रहे हैं वह काबिलियत उसके पास न हो जो आपके पास है। तुलना करने से अक्सर आदमी हीन भावना और निराशा का शिकार होता है।
मान लीजिये आप कोई कार्य कर रहे हैं और उसमें आपको सफलता नहीं मिल रही है ,तो इसके लिए निराश न होकर उसके कारणों की तह में जाकर जानने का प्रयास करें कि असफलता का क्या कारण है। यदि आप को उन कारणों का पता चल जाता है तो ईमानदारी पूर्वक उसे दूर करने का भरपूर प्रयास करें। बीती बातों को भुलाने की कोशिश करें ,क्योंकि जो बीत गया उसमे कुछ किया नहीं जा सकता और चाहते हुए भी वापस नहीं लाया जा सकता। आशा और निराशा इस जीवन रूपी सिक्के के दो पहलू हैं जिनसे कोई भी चाहते हुये भी अलग नहीं रह सकता। इसलिये प्रसन्नचित होकर नए विश्वास के साथ अपने लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाएं ,सफलता अवश्य मिलेगी।
कभी भी अपना लक्ष्य बहुत बड़ा ना रखें। पहले अपनी योग्यताओं का आकलन करें। सपनें संजोना अच्छी बात तो है पर यथार्थ भी कुछ होता है। सपनों का सच होना उनसे जुड़े कई तथ्यों पर निर्भर करता है। जो भी आप लक्ष्य निर्धारित कर रहे हैं क्या उसे पूरा करने लायक योग्यता रखते हैं या नहीं। क्या आप लक्ष्य प्राप्त करने तक अपने निर्णय पर अडिग रह पाएंगे अथवा नहीं ? क्या आपके पास समुचित साधन है ?
हमेशा अपनी योग्यता और क्षमता अनुसार ही अपने लक्ष्य का निर्धारण करें।
समय और अपनी प्रयास करने की क्षमता का सही उपयोग करें। इन दोनों का तालमेल यदि बैठ जाय तो कोई भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है यदि आप समय का सही समय पर सही तरीके से अपनी पूरी क्षमता के साथ सही दिशा में प्रयास करेंगे तो ऐसा कोई कारण नहीं है कि आप सफल ना हों। हमेशा एक बात का ध्यान रखें गुजरा हुआ समय कभी वापस नहीं आताऔर ना ही समय किसी का इंतजार करता है।
प्रेरणा और पॉज़िटिव सोच एक ऐसी शक्ति है जिसके द्वारा हम अपनी इच्छानुसार परिणाम पा सकते हैं। हमारा इतिहास ऐसी कहानियों से भरा पड़ा है कि दृढ़ इच्छाशक्ति के बदौलत लोगों ने असम्भव लगने वाले कार्यों को संभव कर दिखाया। सकारात्मक सोच से हमारे मन में आशावादी विचारों का सृजन होता है ,जिसके फलस्वरूप एक अलग तरह की ऊर्जा उत्पन्न होती है। यही ऊर्जा हमारे भीतर हमारे संकल्पो को मजबूत बनाती है। सकारात्मक सोच और आशावादी विचार हमेशा अपने लक्ष्य के नजदीक ही ले जाते हैं। अतः हमेशा हमें ऐसे लोगों के संपर्क में रहना चाहिए जिनके व्यक्तित्व प्रेरक और जिनकी सोच सकारात्मक हो। कभी कभी सफल लोगों की जीवनी पढ़कर उनसे कुछ हासिल करने की कोशिश करनी चाहिये।
अपने तथा अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखें एवं कभी अपने को कम करके न आंके। क्योंकि कभी कभी ऐसा होता है कि हम अपनी तुलना दूसरों से कर के अपने आपको कम करके आंकने लगते हैं। हर आदमी का स्वभाव और क्षमता अलग अलग होती है। हो सकता जिससे आप अपनी तुलना कर रहे हैं वह काबिलियत उसके पास न हो जो आपके पास है। तुलना करने से अक्सर आदमी हीन भावना और निराशा का शिकार होता है।
मान लीजिये आप कोई कार्य कर रहे हैं और उसमें आपको सफलता नहीं मिल रही है ,तो इसके लिए निराश न होकर उसके कारणों की तह में जाकर जानने का प्रयास करें कि असफलता का क्या कारण है। यदि आप को उन कारणों का पता चल जाता है तो ईमानदारी पूर्वक उसे दूर करने का भरपूर प्रयास करें। बीती बातों को भुलाने की कोशिश करें ,क्योंकि जो बीत गया उसमे कुछ किया नहीं जा सकता और चाहते हुए भी वापस नहीं लाया जा सकता। आशा और निराशा इस जीवन रूपी सिक्के के दो पहलू हैं जिनसे कोई भी चाहते हुये भी अलग नहीं रह सकता। इसलिये प्रसन्नचित होकर नए विश्वास के साथ अपने लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाएं ,सफलता अवश्य मिलेगी।
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